TYPES
128 खास बनावटों की सूची
16 कोर में मिज़ाज (आरामपसंद·लहरपसंद) और रिश्तों की बनावट जुड़कर 128 खास बनावटें बनती हैं। नीचे के नाम सभी Quiga ने खुद बनाए हैं; कोर चुनने पर उस बनावट वाले लोगों की कहानी खुलती है।
Quiga 128 अलग-अलग विश्लेषण सामग्री के आधार पर बनाया गया है, पर इसे हल्के मन से देखो। व्यक्तित्व स्थिर फैसला नहीं है।
SERIES
अग्नि-बारीकी
सोच की चिंगारी से मैदान रोशन करने वाली बारीकी — जो सवाल उठे उसे अंत तक खोदा जाता है, और दिमाग़ में अगली चाल हमेशा जलती रहती है।
अग्नि-बारीकी परिवार विस्तार से
जब दो विकल्प हों, तो बड़ा विकल्प चुनने और उस फैसले के नतीजे को भी अपने नाम से लेने वाला रंग है।
- पहले झंडा गाड़ने वाला अगुआ“पहले कदम, बाद की संभाल मेरे पास”
- मैदान सजाकर मुस्काने वाला मेज़बान“जल्दबाज़ी से दूर, सोच बड़ी”
- डटा रहने वाला रणनीति कमांडर“कमी खोजते-खोजते रात निकल जाती है”
- चुपचाप मैदान आगे बढ़ाने वाला संयोजक“बातें कम, हिसाब पहले ही पूरा”
जब किसी जगह नतीजा तय हो चुका हो, तब 'लेकिन उलटे नज़रिए से देखें तो?' कहकर खेल को फिर से खोलने वाला रंग है।
- पहले चिंगारी फेंकने वाला प्रस्तावक“बैठक के अंत में फिर से चर्चा खोल देता है”
- मज़ाक-मज़ाक में प्रयोग करने वाला खोजी“गंभीर बात में भी मुस्कान ले आता है”
- आपत्ति तक साथ रखने वाला वाद-विवादकर्ता“उलटी राय पहले से तैयार रहती है”
- चुपचाप उलट देने वाले नए खयालों का कारख़ाना प्रमुख“खत्म हुई बात में भी एक पंक्ति डाल देता है”
दूसरों के तय क्रम पर चलने से अधिक, लक्ष्य तक पहुँचने की राह को अपने मानदंड से फिर रचकर चलने वाला रंग है।
- पहले नक्शा रखने वाला संचालक“किसी और की तय की हुई क्रमसूची नहीं अपनाता”
- आराम से पूरा हिसाब करने वाला रणनीतिकार“जल्दबाज़ी नहीं, फिर भी काम पहले से पूरा”
- रास्ते तक तय करने वाला योजनाकार“बुकिंग से पहले नक्शा”
- चुपचाप मैदान बदल देने वाला एकांतप्रिय दिमाग“खामोशी रहती है, निष्कर्ष सामने आ जाता है”
नतीजा निकलने पर भी 'ऐसा क्यों है?' पहले उभरता है, इसलिए आधार की एक परत और हटाकर देखने के बाद ही हामी भरने वाला रंग है।
- पहले शक करने वाला सवालों का संग्रहकर्ता“निष्कर्ष के बाद भी पहले ‘क्यों’ पूछता है”
- घर के कोने में गहराई से खोजने वाला शोधकर्ता“रात के सन्नाटे में सबसे अच्छा चलता है”
- आधार तक खोदने वाली खोलने की टोली“एक परत और हटे, तब बात जमती है”
- चुपचाप परिकल्पना घुमाने वाला प्रयोगशाला प्रमुख“मन के भीतर ही सौ बार प्रयोग”
SERIES
सांझ-बारीकी
मन की गर्माहट से दुनिया रँगने वाली बारीकी — लोगों और अर्थ के सामने यह सबसे गाढ़ी हो जाती है, और भावों की बारीकी सबसे पहले पकड़ लेती है।
जब कोई व्यक्ति बुझा-बुझा दिखे, तो बैठने की जगह तक फिर सँवारकर उसके हिस्से की एक भूमिका बना देने वाला रंग है।
- माहौल पहले बनाने वाला संचालक“असहज 5 सेकंड भी नहीं सहता”
- कदमों की चाल मिलाने वाला साथी“चलने की रफ्तार तक मिला देता है”
- खाली जगह तक सँवारने वाला संयोजक“बैठने की जगह फिर से सजा देता है”
- चुपचाप गर्माहट देने वाला मददगार“बिना जताए सब सँभालकर रख देता है”
अभी-अभी सूझी चीज़ को अकेला नहीं छोड़ पाता, इसलिए उसी दिन किसी को साथ खींचकर शुरू कर देने वाला रंग है।
- सूझते ही शुरुआत कराने वाला अगुआ“उसी दिन किसी न किसी को साथ खींच लाता है”
- उमंग से भरी अनवरत ऊर्जा“उसका जोश पहले पहुँच जाता है”
- मज़े की चीज़ें खोज लाने वाला टोह लेने वाला“मनोरंजन की सारी चीज़ें पहले ही ढूँढ़ रखता है”
- अकेले देर तक रोमांचित रहने वाला कल्पना-घर“बिना बोले भी मन में उत्सव चलता रहता है”
किसी व्यक्ति की छह महीने पहले कही बात तक जोड़कर अनुमान लगा लेने पर भी, सामने वाला पूछे बिना उसे बाहर न लाने वाला रंग है।
- पहले भाँपकर आगे बढ़ने वाला प्रकाशस्तंभ“एक भाव से ही समझ जाता है”
- चुपचाप चमकता रात का समुद्र“पास रहकर ही अपनी बात कहता है”
- छह महीने पुरानी बात भी जोड़ने वाला दर्जकर्ता“बिखरी हुई हर बात को जोड़ देता है”
- मन की बात तक पढ़ लेने वाला स्कैनर“पूछे जाने तक उसे बाहर नहीं लाता”
बाहर से लगभग हर बात के साथ चलने पर भी, अपने भीतर के मानदंड से टकराने वाली एक बात पर चुपचाप न हिलने वाला रंग है।
- मानदंड पर बात आए तो आगे आने वाला बाग़ी“सबके हिसाब से चलकर भी एक जगह रुक जाता है”
- बादलों पर बहता स्वप्निल यात्री“आज मन जिस ओर जाए, उसी ओर”
- अपनी पसंद सँभालने वाला वाक्य-संग्राहक“अच्छे वाक्य सभी बटोरकर रखता है”
- बहुत कुछ सँजोए रखने वाली दराज़ का मालिक“जो नहीं कहा, वह ज़्यादा है”
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जड़-बारीकी
न डगमगाने वाली जड़ से रोज़मर्रा सँभालने वाली बारीकी — योजना, दिनचर्या और देखभाल से आसपास को मज़बूती से थामे रखती है।
फैसले की बात पसंद न आने से ज़्यादा, फैसला हुए बिना समय बीतते रहना असहज लगता है; इसलिए पहले तय करके सबको बताना बेहतर लगता है।
- तुरंत फैसला करके सूचना देने वाला टीम-प्रमुख“अनिश्चित स्थिति सबसे ज़्यादा खलती है”
- आराम से सबको क्रम में लगाने वाला प्रबंधक“जल्दी का आभास नहीं, फिर भी सब सधा हुआ”
- पहले मानक तय करने वाला निरीक्षक“नंबर लगाकर शुरुआत होती है”
- चुपचाप सहेजने वाला घर-संभालक“बिना कुछ कहे सब अपनी जगह”
मिलने-जुलने की खबर सुनकर क्या होगा से पहले कौन आ रहा है, यह गिनना स्वाभाविक लगता है; कोई नाम छूटा दिखे तो उसे यूँ ही छोड़ना मुश्किल लगता है।
- काम से पहले लोगों को बुलाने वाला जश्न-संयोजक“क्या होगा से पहले, कौन आएगा”
- आराम से ध्यान रखने वाला अपना-सा पड़ोसी“पास होने से माहौल सहज हो जाता है”
- छूटे नाम गिनने वाला संयोजक“उस व्यक्ति के लिए जगह खाली रहती है”
- चुपचाप ध्यान रखने वाली समेटने की टोली“सब खत्म होने के बाद रुककर समेटने वाला”
नई विधि अच्छी लगे तब भी पिछली बार का ब्योरा पहले खोलकर देखने का मन होता है; वहाँ कोई कारगर तरीका मिल जाए तो उसी को फिर अपनाना बेहतर लगता है।
- पहले मानक से मिलाने वाला नियम-प्रमुख“जो तरीका चल चुका हो, वही सबसे तेज़ पड़ता है”
- चुपचाप दिनचर्या चलाने वाला कारीगर“कल जैसा आज अच्छा लगता है”
- पहले रिकॉर्ड खोलने वाला जाँच-प्रबंधक“पिछली बार वाली फ़ाइल निकल आती है”
- अपनी जगह टिके रहने वाला पहरेदार“बदलाव पर एक पल ठहराव आता है”
कई जगहें बनाने से पहले, आज मुश्किल में पड़े एक व्यक्ति के पास आखिर तक बने रहने का विकल्प ज़्यादा सहज लगता है।
- पहले पास जाकर बैठने वाला सहारा“मुश्किल में लगे व्यक्ति के पास पहले जगह बनती है”
- अंत तक पास रहने वाली परछाईं“जाने की बात किए बिना बस साथ बना रहना”
- पहले से सब तैयार रखने वाली तैयारी टोली“खाने-पीने की पसंद तक दर्ज रहती है”
- चुपचाप देर तक रहने वाला पीछे का सहारा“धन्यवाद पर हाथ हिलाकर टाल देते हैं”
SERIES
हवा-बारीकी
इसी पल पर सवार होकर खेलने वाली बारीकी — शरीर पहले चलता है, और मौके पर यह सबसे ज़्यादा चमकती है।
स्थिति बदलते ही योजना बदल दी जाती है, और बदली हुई उसी जगह में उतरकर अपने अनुभव से परखना ज़्यादा सहज लगता है।
- बदले हुए मैदान में कूदने वाला खिलाड़ी“योजना बदलकर भी जाकर देखना है”
- लहरों के संग घूमने वाला मुसाफिर“रुख बदले तो और मज़ा आता है”
- अपने हाथों से परखने वाला टोहिया“छूकर देखकर ही फैसला”
- चुपचाप खेल पढ़ने वाला मुकाबलेबाज़“बिना जताए, एक ही बार में कदम”
कमरे में आते ही चेहरों को पहले देखना और जो व्यक्ति सबसे ज़्यादा सिमटा हो, उसके पास जाकर माहौल हल्का करना स्वाभाविक लगता है।
- आते ही नज़र खींचने वाला मुख्य किरदार“कदम रखते ही माहौल गरम हो जाता है”
- माहौल के संग मस्ती करने वाला रौनक-रचयिता“पहले चुप बैठे लोगों को साथ लेना”
- दर्शकों तक को पढ़ने वाला मंच संचालक“हँसाते हुए हर प्रतिक्रिया पर नज़र”
- चुपचाप हँसाने वाला माहौल का जादूगर“एक वाक्य में हवा बदल जाती है”
किसी के समझाते रहने के दौरान भी हाथ ढक्कन खोलकर यह टटोल रहे होते हैं कि गड़बड़ी कहाँ है।
- बातों से तेज़ हाथ वाला हलकर्ता“समझाते-समझाते ढक्कन खुल चुका होता है”
- आराम से सब ठीक करने वाला हरफनमौला हाथ“जल्दी नहीं, फिर भी काम पूरा”
- जड़ तक खोलने वाला बारीक मरम्मतकार“पहले देखना कि कहाँ गड़बड़ हुई”
- बिना बोले काम पूरा करने वाला पीछे का हाथ“सब कर देना और बताना नहीं”
अगला कदम तय करते समय तालिका खोलने की जगह, आज हाथ और आँखों को जो अच्छा लगा हो, उसी ओर मुड़ना स्वाभाविक लगता है।
- अपनी पसंद को आगे रखने वाला रसिक“दिल को लग जाए तो पीछे हटना नहीं”
- हवा के संग चलने वाला घूमता पथिक“आज नज़र जिस ओर ठहर जाए”
- बारीकी तक चुनने वाला पसंद का क्यूरेटर“एक चीज़ चुनने में भी समय लगना”
- चुपचाप सुंदर चीज़ें बटोरती नज़र“जो औरों से छूट जाए, वह दिख जाना”
Quiga 128 परिचित चार-अक्षर वाले प्रकार-लेखन को उधार लेकर बनाया गया मनोरंजन के लिए अपना परीक्षण है। इसका आधिकारिक MBTI® परीक्षण या उसके संस्थान से कोई संबंध नहीं है, और यह चिकित्सीय या मनोवैज्ञानिक निर्णय के लिए नहीं है।
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