मैं

बिना जल्दबाज़ी का समय-भरोसा
RGMH
प्रकार चुनें (मापा नहीं गया)
दूसरा व्यक्ति

मौके पर बोल उठने वाला
CGQK
प्रकार चुनें (मापा नहीं गया)
अभी दोनों की केमिस्ट्री
66अंक
अलग-अलग मिज़ाज
अंदाज़ अलग हों, फिर भी कुछ पल एक-दूसरे से जुड़ते हैं।
यह अभी दोनों के हिसाब से है — प्यार हालात और लोगों के साथ बदलता है।
इस लिंक में दोनों के नतीजे साथ हैं। एक बार साझा हो जाने के बाद लिंक वापस नहीं लाया या मिटाया नहीं जा सकता।
यह माप का नतीजा नहीं, चुने गए प्रकार से निकली गणना है।
दिल की बात पहुँचाने के मामले में दोनों के अंदाज़ सबसे करीब हैं
मन की बात आती-जाती रहती है, फिर भी कुछ सुबहें ऐसी होती हैं जब इशारे का मतलब साफ़ नहीं हो पाता। एक ही भावना किसी दिन शब्दों में और किसी दिन खयाल रखने के काम में पहुँचती है।
छह पल, दो लोग
रोज़मर्रा की साझेदारी71
भावनाएँ जताना74
अगला क़दम67
टकराव के समय67
भविष्य की बातें67
साथ रहने की लय69
रोज़मर्रा की साझेदारी71
इस पहलू में पास होने की चाह का समय अलग है, इसलिए दिन भर जुड़ाव बनाए रखने में काफ़ी मेहनत लगती है
हर दिन उस पक्ष की चाह सामने आती है जो काम से लौटते समय फ़ोन का इंतज़ार करता है और उस पक्ष की भी जो शाम चुपचाप बिताना चाहता है। बहुत से जोड़े हालचाल की एक पंक्ति और एक कॉल के दिन पहले से तय कर लेते हैं।
दोनों के बीच मन की बात इशारों में कहने का ढंग है वाली बात दोनों के लिए सहज है, लेकिन पास रहने और थोड़ी दूरी रखने का मिला-जुला अंदाज़ है वाले मामले में थोड़ा ज़्यादा समय और ध्यान लगता है।
भावनाएँ जताना74
दिल के इशारे आसानी से चूक जाते हैं, इसलिए मन की बात पक्की करने में थोड़ी मेहनत लगती है
अगला क़दम67
इस पहलू में एक ओर बड़ा कदम और दूसरी ओर थोड़ा और समय देखने की चाह है, इसलिए साथ-साथ आगे बढ़ने में काफ़ी मेहनत लगती है
एक घड़ी मन साफ़ होते ही चल पड़ती है और दूसरी उतना ही आगे बढ़ती है जितना बात पक्की हो। एक ही फैसले पर «अभी चलें» और «थोड़ा और देखते हैं» एक ही शाम में साथ सुनाई देते हैं।
झट से बढ़ने और जाँचते हुए बढ़ने की मिली-जुली रफ़्तार है में थोड़ा ज़्यादा समय और ध्यान लगता है।
टकराव के समय67
इस पहलू में अभी बात सुलझाने या पहले मन ठंडा करने की चाह अलग है, इसलिए फिर से सहज होकर मिलने में काफ़ी मेहनत लगती है
एक ही रात «अभी बात करते हैं» और «सोकर उठने के बाद बात करते हैं» दोनों सुनाई देते हैं। बहुत से जोड़े लौटकर बात करने का दिन पहले बता देते हैं और वह रात अपनी-अपनी तरह बिताते हैं।
तुरंत सुलझाने और थोड़ा ठहरकर सुलझाने का मिला-जुला ढंग है में थोड़ा ज़्यादा समय और ध्यान लगता है।
भविष्य की बातें67
इस पहलू में आने वाले कल को देखने की दूरी अलग है, इसलिए साझा तस्वीर बनाने में काफ़ी मेहनत लगती है
आगे बढ़ने की रफ़्तार और अपनी-अपनी ज़िंदगी के लिए रखी जगह अलग-अलग दिखाई देती है। दोनों अपनी-अपनी योजना लिखकर पहले उन हिस्सों को मिला लें जो एक-दूसरे पर चढ़ते हैं, तो तस्वीर कुछ आसानी से एक बन जाती है।
साथ रहने की लय69
इस पहलू में साथ समय बिताने का अंदाज़ अलग है, इसलिए लय मिलाने में काफ़ी मेहनत लगती है
साथ रहने की चाह वाली शाम और अकेले रहने की चाह वाली शाम, अभी बात सुलझाने वाली रात और ठहरकर लौटने वाली रात—सब एक ही घर में साथ मौजूद हैं। एक ही बैठक में अलग-अलग रफ़्तार वाली शामें साथ-साथ गुज़रती हैं।
वही दो लोग हों, फिर भी हर पल का अंदाज़ अलग होता है। नीचे का स्तर मेल न होने का मतलब नहीं, बस कम सहज पल थोड़े ज़्यादा बार आते हैं।
यह आप दोनों की अभी की स्थिति पर आधारित, सिर्फ़ मनोरंजन के लिए है।
हाथों से समझ आने वाला दिल, तीन अलग ताल

मौके की बोली और बिना जल्दबाज़ी की फ़ितरत, दिल पहुँचाते समय सबसे अच्छी तरह मिलती हैं। दोनों शब्दों से ज़्यादा ख़याल रखकर मन की बात देते हैं, इसलिए शांत शाम में भी गरमाहट आती-जाती रहती है।
जब तालमेल बैठता है
जिस दिन सर्दी की आहट हो, दवा और खिचड़ी बिना कहे तैयार मिलती है; दोनों हाथों के ख़याल से एक-दूसरे का मन पहचान लेते हैं।
दिन का हाल बताते समय एक पक्ष काम से लौटते हुए मिलने आता है और दूसरा दरवाज़ा खुला रखता है; समय छोटा हो तब भी शाम गर्म हो जाती है।
जब थोड़ा कम सहज लगता है
अगला कदम तय करते समय और झगड़े वाली रात, एक पक्ष अभी तय और अभी सुलझाना चाहता है, जबकि दूसरा पहले पक्का करके और ठंडा होकर लौटना चाहता है। दोनों की घड़ी दो बार अलग चलती है। कई जोड़े पहले ही बता देते हैं कि किस दिन वापस बात होगी।
एक जैसे अंदाज़ की छाया
दोनों बिना कहे ख़याल रखते हैं, इसलिए चुपचाप गर्माहट बनी रहती है; मगर मन की टीस भी बिना कहे जमा होकर कभी एक साथ बाहर आ जाती है।
जब दोनों खुद करके देखें चुने हुए प्रकार से नहीं, असली अंदाज़ से केमिस्ट्री निकलती है।
केमिस्ट्री स्कोर मनोरंजन के लिए है। यह निदान या फैसला नहीं है।