मैं

बात का भरोसेमंद साथी
RDMK
प्रकार चुनें (मापा नहीं गया)
दूसरा व्यक्ति

धीमी साथ-चाल
CGMH
प्रकार चुनें (मापा नहीं गया)
अभी दोनों की केमिस्ट्री
74अंक
आधा मिलता-जुलता मिज़ाज
अंदाज़ अलग हों, फिर भी कुछ पल एक-दूसरे से जुड़ते हैं।
यह अभी दोनों के हिसाब से है — प्यार हालात और लोगों के साथ बदलता है।
इस लिंक में दोनों के नतीजे साथ हैं। एक बार साझा हो जाने के बाद लिंक वापस नहीं लाया या मिटाया नहीं जा सकता।
यह माप का नतीजा नहीं, चुने गए प्रकार से निकली गणना है।
रिश्ते में अगला कदम साथ बढ़ाना दोनों के लिए सबसे आसान है
अगले कदम की तारीख कभी एक बार अलग तय हो जाए, तब भी दोनों के बीच बड़ी दूरी नहीं बनती। बड़े फैसले के लिए पर्याप्त समय रख दें तो तालमेल अपने-आप बैठ जाता है।
छह पल, दो लोग
रोज़मर्रा की साझेदारी70
भावनाएँ जताना68
अगला क़दम82
टकराव के समय69
भविष्य की बातें78
साथ रहने की लय73
रोज़मर्रा की साझेदारी70
इस पहलू में पास होने की चाह का समय अलग है, इसलिए दिन भर जुड़ाव बनाए रखने में काफ़ी मेहनत लगती है
हर दिन उस पक्ष की चाह सामने आती है जो काम से लौटते समय फ़ोन का इंतज़ार करता है और उस पक्ष की भी जो शाम चुपचाप बिताना चाहता है। बहुत से जोड़े हालचाल की एक पंक्ति और एक कॉल के दिन पहले से तय कर लेते हैं।
दोनों में अगला कदम धीरे-धीरे बढ़ाने की रफ़्तार है वाली बात दोनों के लिए सहज है, लेकिन पास रहने और थोड़ी दूरी रखने का मिला-जुला अंदाज़ है वाले मामले में थोड़ा ज़्यादा समय और ध्यान लगता है।
भावनाएँ जताना68
इस पहलू में दिल की बात अलग-अलग भाषा में आती-जाती है, इसलिए उसका मतलब एक-दूसरे तक पहुँचाने में काफ़ी मेहनत लगती है
एक पक्ष मन की बात शब्दों में सुनना चाहता है और दूसरा चुपचाप खयाल रखकर जताना चाहता है, इसलिए दोनों अलग-अलग भाषाओं में संकेत देते हैं। जिस पल कोई संकेत समझ में आए, «अच्छा, यही मन की बात थी» कहकर उसे पहचान लें तो अगला संकेत पढ़ना कुछ आसान हो जाता है।
अगला क़दम82
कदमों की रफ़्तार में थोड़ा फ़र्क़ हो, तब भी साथ मिलकर समय तय करने पर तालमेल बैठ जाता है
तुरंत सुलझाने और थोड़ा ठहरकर सुलझाने का मिला-जुला ढंग है में थोड़ा समय और ध्यान लगता है, फिर भी इस मामले में दोनों के बीच तालमेल रहता है।
टकराव के समय69
इस पहलू में अभी बात सुलझाने या पहले मन ठंडा करने की चाह अलग है, इसलिए फिर से सहज होकर मिलने में काफ़ी मेहनत लगती है
एक ही रात «अभी बात करते हैं» और «सोकर उठने के बाद बात करते हैं» दोनों सुनाई देते हैं। बहुत से जोड़े लौटकर बात करने का दिन पहले बता देते हैं और वह रात अपनी-अपनी तरह बिताते हैं।
भविष्य की बातें78
योजनाओं की तारीख़ें आसानी से नहीं मिलतीं, इसलिए दोनों तस्वीरों को एक करने में थोड़ी मेहनत लगती है
एक ही मंज़िल सामने रखकर भी योजनाओं में लिखी तारीखें अक्सर अलग होती हैं। कोई हिस्सा इस मौसम में लिखा जाता है, तो कोई अगले साल में।
साथ रहने की लय73
आराम और मुलाक़ात का अंदाज़ अलग पड़ता है, इसलिए रोज़मर्रा का साथ बनाए रखने में थोड़ी मेहनत लगती है
कभी एक ही शाम में पास रहने की चाह और अकेले रहने की चाह साथ आ जाती है। बहुत से जोड़े साथ रहने वाले दिन और अपनी-अपनी जगह वाले दिन अलग-अलग रख लेते हैं।
वही दो लोग हों, फिर भी हर पल का अंदाज़ अलग होता है। नीचे का स्तर मेल न होने का मतलब नहीं, बस कम सहज पल थोड़े ज़्यादा बार आते हैं।
यह आप दोनों की अभी की स्थिति पर आधारित, सिर्फ़ मनोरंजन के लिए है।
एक ही चाल, फूल और वाक्य बनकर आता अपनापन

साथ-चाल और भरोसेमंद साथी अगले कदम को पक्का करके एक-एक पड़ाव बढ़ने के रंग-ढंग में समान हैं। कोई जल्दी नहीं करता, इसलिए अगला कदम दोनों के लिए सबसे आरामदेह जगह बन जाता है।
जब तालमेल बैठता है
आगे की तस्वीर भी दोनों पक्की हुई चीज़ों से ही बनाते हैं, इसलिए योजना के उलट जाने की नौबत कम आती है।
साथ रहते समय सहज अंदाज़ की पास रहकर भरी हुई शाम और भरोसे वाले अंदाज़ की अकेले सहेजी हुई रातें सप्ताह के दिनों में अपनी-अपनी जगह ले लेती हैं, इसलिए कुछ हफ्तों में लय बैठ जाती है।
जब थोड़ा कम सहज लगता है
मन की बात पहुँचाते समय भरोसेमंद साथी मेज़ पर «पसंद है» शब्दों में सुनना चाहता है, पर किसी सुबह वहाँ साथ-चाल के बदले रखा हुआ एक फूल ही मिलता है। फूल देखने वाला पक्ष अक्सर हँसकर कहता है, «यही तुम्हारी बात है, है न?»
एक जैसे अंदाज़ की छाया
जल्दबाज़ी नहीं होती, इसलिए चाल स्थिर रहती है, लेकिन «पहले तुम कहो» कहते-कहते एक-दूसरे की प्रतीक्षा में मौसम भी बदल जाता है।
जब दोनों खुद करके देखें चुने हुए प्रकार से नहीं, असली अंदाज़ से केमिस्ट्री निकलती है।
केमिस्ट्री स्कोर मनोरंजन के लिए है। यह निदान या फैसला नहीं है।